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अहिंसा परमो धर्म:

धर्मो रक्षति रक्षितः

“जो धर्म की रक्षा करता है,  धर्म उसकी रक्षा करता है।”
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

मेरे गुरुवर... आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

गाय का दूध पीने वालो! गाय का खून मत होने दो, राष्ट्र की रक्षा और प्रजा का पालन हमारा धर्म होना चाहिए। यदि हम राष्ट्र की रक्षा और प्रजा का पालन नहीं कर सके तो हमारा अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। हमारे पास आज राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रीय चिह्न है लेकिन ‘राष्ट्रीय चरित्र’ नहीं हैं। यदि हम अपना राष्ट्रीय चरित्र बना लें तो हमारे राष्ट्र का भला है। वह राष्ट्रीय चरित्र क्या है? सत्य और अहिंसा ही हमारा राष्ट्रीय चरित्र हो, सत्य और अहिंसा ही हमारा राष्ट्रीय धर्म हो और यदि हमारे नस-नस में इस राष्ट्रीयता का संचार हो जाए तो फिर हमको किसी दूसरी चीज का सहारा लेने की कोई आवश्यकता नहीं।

-१९९७, नेमावर

मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज

मुनि श्री अविचल सागर जी महाराज

यह कर्माधीन संसार अनेक प्रकार के दुःखो से भरा हुआ है | और इस संसार से जो जीव अपना कल्याण उद्धार चाहता है उसे सर्व प्रथम ” दया भावना ” और इससे संबंधित क्रिया की पूर्ति करना परम अनिवार्य होता है|

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